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भौतिक जगत के पदार्थों के आपस में तथा भौतिक पदार्थों के ब्रह्मा के संग पारस्परिक संबंध का उनके ऊर्जा में परिवर्तन अनुसार ( जिसे गीता में पदार्थों के गुण कहा गया है) तीन प्रकार से विभाजन कर सकते हैं | यहां गुण से अर्थ ऊर्जा के 3 प्रकार से है जिनसे हम किसी भी पारस्परिक संबंध में ऊर्जा आदान-प्रदान की गणना कर सकते हैं |

1. सात्विक गुण (photon energy)यह संबंध में पूर्ण ऊर्जा रुप ब्रह्मा के गुण हैं | किसी भी संबंध में ब्रह्मा का होना उसकी ऊर्जा को सात्विक गुण कहते हैं यदि संबंध के पूर्व कुल ब्रह्मा की ऊर्जा संबंध के पश्चात के कुल ब्रह्मा की ऊर्जा से अधिक है तो संबंध में सात्विक गुण कम हुए |

2. राजसिक गुण संबंध में भौतिक पदार्थों की ऊर्जा जो कि उनके गति से है यह राजसिक गुण(kinetic energy) है | संबंध पश्चात यदि पदार्थ की गति उर्जा में वृद्धि हुई तो उसके राजसिक गुण में वृद्धि हुई |

 

 

3. तामसिक गुण संबंध में भौतिक पदार्थों के मध्य सामर्थ्य ऊर्जा , यह तामसिक ऊर्जा (potential energy)है | यह सामर्थ्य ऊर्जा को हम शक्तियों के अनुसार पुनः विभाजित कर सकते हैं जैसे पदार्थों के मध्य चुंबकीय शक्ति से उत्पन्न सामर्थ्य ऊर्जा(magnetic potential energy) विद्युत शक्ति से उत्पन्न सामर्थ्य ऊर्जा (electrical potential energy)या गुरुत्वाकर्षण से उत्पन्न सामर्थ्य ऊर्जा (gravitational potential energy)|

 

 

क्योंकि कुल ऊर्जा का योग सर्वदा समान रहता है (अर्थ ऊर्जा ना बना सकते हैं ना नष्ट कर सकते हैं ), किसी भी पारस्परिक संबंध में संबंध के पूर्व तथा पश्चात कुल सात्विक+राजसिक+तामसिक गुण एक समान रहते हैं | किंतु पदार्थों को पृथक पृथक देखा जाए तो उनके इन तीन गुणों में परिवर्तन होते हैं | 

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