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अनुलोम विलोम प्राणायाम की विधि और लाभ 

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 अंगूठे से  दाईं नासिका को  बंद कर  बाईं नासिका से  श्वास पूरा अंदर भर के  फिर अनामिका अथवा मध्यमा  उंगली  से  बाएं नासिका  को बंद कर  दाएं नासिका  से पूर्ण श्वास  छोड़ देना चाहिए  फिर पुनः  दाईं नासिका  से श्वास पूरा भर  बाएं नासिका से छोड़ देना चाहिए | यह अनुलोम विलोम प्राणायाम है |  खाली समय में इसे धीमी गति से करना चाहिए | मन को स्थिर करने में यह बहुत लाभकारी है | खाली पेट मध्यम या तीव्र गति से  करने पर इसमें श्वास प्रश्वास की गति  जो प्राणायाम की है , जब वह ह्रदय की धमनियों  की  आकुंचन  प्रसारण  की प्राकृतिक गति से मिल जाती है , तो अनुनाद से  उत्पन्न शक्ति  से ह्रदय की धमनियों में  कोई भी अवरोध हो , वह बड़ी आसानी से खुल जाते हैं | श्वास  की गति को  कम करने में  यह उत्तम प्राणायाम है | अनुलोम विलोम के  तीव्र गति में अभ्यास से  यह कुंडलिनी  चक्र के जागरण  में सहायक है  जिसमें  मूलाधार  से आरंभ कर  सहस्त्रार  तक सभी चक्रों  में ऊर्जा का प्रवाह होता है  और इसे कुंडलिनी जागरण कहते हैं  |  मैंने स्वयं इसका अनुभव कभी नहीं किया है,  किंतु निरंतर अभ्यास से  उत्कृष्ट योगी  इसका अनुभव कर सकते हैं | 

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